3.60 Lakh Crore Defense Deal : भारत सरकार ने देश की सैन्य शक्ति को और अधिक मजबूत बनाने के लिए लगभग 3.60 लाख करोड़ रुपये के बड़े रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री Rajnath Singh की अध्यक्षता में हुई Defence Acquisition Council की बैठक में भारतीय वायुसेना, थलसेना, नौसेना और तटरक्षक बल के लिए कई महत्वपूर्ण हथियारों और सैन्य प्लेटफॉर्म की खरीद को स्वीकृति मिली। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब भारत को एक तरफ चीन की आक्रामक गतिविधियों और दूसरी तरफ पाकिस्तान समर्थित सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
भारतीय वायुसेना को मिलेगा बड़ा बल
सरकार ने भारतीय वायुसेना के लिए Multi Role Fighter Aircraft यानी MRFA कार्यक्रम को मंजूरी दी है, जिसके तहत आधुनिक लड़ाकू विमान खरीदे जाएंगे। माना जा रहा है कि इस परियोजना में Dassault Rafale जैसे उन्नत फाइटर जेट शामिल हो सकते हैं। खास बात यह है कि इन विमानों का बड़ा हिस्सा भारत में ही बनाया जाएगा, जिससे “मेक इन इंडिया” और रक्षा उत्पादन को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा।
इन फाइटर जेट्स की मदद से भारतीय वायुसेना लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम होगी। चीन के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा और पाकिस्तान सीमा पर किसी भी संघर्ष की स्थिति में ये विमान तेजी से जवाबी कार्रवाई कर सकेंगे। आधुनिक मिसाइलों के शामिल होने से भारत की deep strike capability कई गुना बढ़ जाएगी, जिससे दुश्मन के एयरबेस, रडार और सैन्य ठिकानों को दूर से ही निशाना बनाया जा सकेगा।
AS-HAPS से मिलेगी आसमान में लगातार निगरानी
सरकार ने Air-Ship Based High Altitude Pseudo Satellite यानी AS-HAPS को भी मंजूरी दी है। यह एक ऐसा आधुनिक प्लेटफॉर्म है जो लंबे समय तक ऊंचाई पर रहकर निगरानी कर सकता है। इसका उपयोग intelligence gathering, surveillance, electronic intelligence और communication के लिए किया जाएगा।
चीन की सीमा पर लगातार निगरानी रखने और पाकिस्तान की गतिविधियों पर नजर बनाए रखने में यह तकनीक बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। इससे भारतीय सेना को real-time intelligence मिलेगी और दुश्मन की गतिविधियों का पहले से पता लगाया जा सकेगा।
3.60 Lakh Crore Defense Deal : थलसेना को मिलेंगी नई एंटी-टैंक माइंस
भारतीय सेना के लिए “विभव” नाम की Anti-Tank Mines खरीदने को मंजूरी दी गई है। इन माइंस का उद्देश्य दुश्मन के टैंकों और भारी सैन्य वाहनों की गति को रोकना है। यदि भविष्य में पाकिस्तान की तरफ से बख्तरबंद हमला होता है, तो ये माइंस उसकी सेना की प्रगति को धीमा कर सकती हैं। इसके अलावा T-72 टैंकों, Armoured Recovery Vehicles और BMP-2 Infantry Combat Vehicles के overhaul कार्यक्रम को भी मंजूरी दी गई है। इससे पुराने सैन्य प्लेटफॉर्म की क्षमता बढ़ेगी और वे आने वाले वर्षों तक युद्ध के लिए तैयार रहेंगे।
नौसेना की ताकत भी होगी कई गुना मजबूत
3.60 Lakh Crore Defense Deal के अंतरगर्त भारतीय नौसेना के लिए 04 MW Marine Gas Turbine आधारित Electric Power Generator और Boeing P-8I Neptune Long Range Maritime Reconnaissance Aircraft खरीदने को स्वीकृति दी गई है।
P8I विमान हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती नौसैनिक गतिविधियों पर नजर रखने में बेहद महत्वपूर्ण हैं। ये विमान दुश्मन की पनडुब्बियों को खोजने और समुद्री निगरानी करने में सक्षम हैं। इससे भारत की anti-submarine warfare क्षमता मजबूत होगी और हिंद महासागर में चीन की रणनीतिक चुनौती का जवाब देना आसान होगा।
Marine Gas Turbine आधारित Generator को “Make-I” श्रेणी के तहत विकसित किया जाएगा। इससे विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी और भारतीय रक्षा उद्योग को नई तकनीक और रोजगार के अवसर मिलेंगे।
तटरक्षक बल को भी मिलेगी आधुनिक तकनीक
भारतीय तटरक्षक बल के Dornier विमान के लिए Electro-Optical और Infra-Red सिस्टम खरीदने की मंजूरी भी दी गई है। इससे समुद्री सीमाओं की निगरानी अधिक प्रभावी होगी और संदिग्ध जहाजों या घुसपैठ की पहचान तेजी से की जा सकेगी। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में पाकिस्तान और चीन की गतिविधियों पर नजर रखने में यह तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
3.60 Lakh Crore Defense Deal : भारत के रक्षा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा फायदा
इन रक्षा सौदों का सबसे बड़ा फायदा भारत के defence manufacturing sector को मिलने वाला है। सरकार का फोकस इस बार केवल हथियार खरीदने पर नहीं बल्कि भारत में निर्माण बढ़ाने पर भी है। इससे निजी और सरकारी रक्षा कंपनियों को बड़े ऑर्डर मिलेंगे।
Hindustan Aeronautics Limited, Bharat Electronics Limited, Bharat Dynamics Limited और कई निजी defence कंपनियों को इससे बड़ा लाभ मिल सकता है। इससे रोजगार बढ़ेंगे, नई तकनीक आएगी और भारत धीरे-धीरे defence exporter बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
चीन और पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश
भारत के इस बड़े रक्षा निवेश को चीन और पाकिस्तान के लिए एक मजबूत रणनीतिक संदेश माना जा रहा है। चीन लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है और पाकिस्तान भी आधुनिक हथियार हासिल करने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में भारत ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी सुरक्षा चुनौती का जवाब देने के लिए तेजी से अपनी सैन्य क्षमता को आधुनिक बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह रक्षा आधुनिकीकरण भारत को एशिया की सबसे शक्तिशाली सैन्य ताकतों में शामिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

Source: “DD News”
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