भारत का Divyastra Mk3 तैयार, जेट इंजन से लैस स्वदेशी लूटेरिंग म्यूनिशन की पहली उड़ान

भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक को एक और महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला है। Kawa UAV Pvt. Ltd. (Hoverit) ने अपने नए Divyastra Mk3 का सफल पहली उड़ान परीक्षण पूरा किया है। कंपनी के अनुसार, Divyastra Mk3 भारत का स्वदेशी जेट-चालित लूटेरिंग म्यूनिशन है, जिसे आधुनिक युद्धक्षेत्र में महत्वपूर्ण लक्ष्यों के खिलाफ सटीक प्रहार क्षमता के लिए विकसित किया गया है।

कंपनी के मुताबिक, Divyastra Mk3 की पहली उड़ान 11 अगस्त 2026 को सफलतापूर्वक पूरी हुई। इस विकास को भारत में स्वदेशी एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण क्षमताओं के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

Divyastra Mk3 की तकनीकी विशेषताएं

Divyastra Mk3 से संबंधित कुछ रिपोर्टों में इसकी गति 250 से 300 किलोमीटर प्रति घंटा और मारक दूरी 300 से 400 किलोमीटर के बीच बताई गई है। हालांकि, इन आंकड़ों की अभी तक उपलब्ध सार्वजनिक आधिकारिक जानकारी में स्पष्ट पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इन आंकड़ों को रिपोर्ट में बताए गए अनुमानित आंकड़े माना जाना चाहिए।

Divyastra Mk3 एक जेट-चालित लूटेरिंग म्यूनिशन है। इस प्रकार की हथियार प्रणाली को लक्ष्य क्षेत्र के आसपास कुछ समय तक मंडराने और उपयुक्त लक्ष्य मिलने पर सटीक प्रहार करने के उद्देश्य से विकसित किया जाता है।

इसकी वास्तविक पेलोड क्षमता, उड़ान अवधि, वारहेड और मार्गदर्शन प्रणाली से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। इसलिए इन तकनीकी क्षमताओं को लेकर किसी अनुमान को आधिकारिक विनिर्देश नहीं माना जाना चाहिए।

स्वदेशी जेट इंजन है बड़ी खासियत

Divyastra Mk3 की प्रमुख विशेषताओं में इसका स्वदेशी जेट इंजन शामिल है। Hoverit के अनुसार, इस इंजन को DC Propulsion ने विकसित किया है।

कंपनी का कहना है कि Divyastra Mk3 के विकास में आयातित जेट इंजन या विदेशी महत्वपूर्ण उप-प्रणालियों पर निर्भरता नहीं रखी गई है। यह भारत की आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण क्षमता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि हो सकती है।

स्वदेशी प्रणोदन तकनीक के विकास से भारत को भविष्य में मानव रहित हवाई प्रणालियों और सटीक प्रहार करने वाले रक्षा प्लेटफॉर्म के क्षेत्र में अपनी तकनीकी क्षमताओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

लूटेरिंग म्यूनिशन क्या होता है?

लूटेरिंग म्यूनिशन एक ऐसी मानव रहित हथियार प्रणाली होती है, जो लक्ष्य क्षेत्र के आसपास कुछ समय तक उड़ान भर सकती है। जब उपयुक्त लक्ष्य की पहचान होती है, तो प्रणाली का इस्तेमाल उस लक्ष्य पर सटीक हमला करने के लिए किया जा सकता है।

यही क्षमता इसे पारंपरिक गोला-बारूद से अलग बनाती है। ऐसी प्रणालियों को सामान्य तौर पर निगरानी, लक्ष्य पहचान और सटीक प्रहार जैसी युद्धक्षेत्र आवश्यकताओं के साथ जोड़ा जाता है।

चीन और पाकिस्तान के खिलाफ क्यों महत्वपूर्ण?

भारत के लिए ऐसी स्वदेशी तकनीक का सामरिक महत्व काफी बड़ा हो सकता है। चीन और पाकिस्तान के साथ संभावित उच्च-तीव्रता वाले संघर्ष में मानव रहित सटीक प्रहार प्रणालियां भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं को मजबूत कर सकती हैं।

यदि रिपोर्टों में बताई गई 300–400 किलोमीटर की मारक दूरी भविष्य के परिचालन स्वरूप में आधिकारिक रूप से पुष्ट होती है, तो इस प्रकार की प्रणाली अग्रिम मोर्चे से काफी दूरी पर स्थित सामरिक लक्ष्यों के खिलाफ उपयोगी हो सकती है।

हालांकि, किसी विशेष दुश्मन लक्ष्य या वास्तविक तैनाती के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा, क्योंकि Divyastra Mk3 की पूरी परिचालन क्षमता और तैनाती से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक नहीं है।

भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए बड़ा कदम

Divyastra Mk3 का विकास केवल एक नए हथियार मंच के रूप में ही महत्वपूर्ण नहीं है। स्वदेशी जेट प्रणोदन, मानव रहित विमान तकनीक, सटीक मार्गदर्शन और रक्षा विनिर्माण में क्षमताओं का विकास भारत के दीर्घकालिक रक्षा तकनीकी तंत्र को मजबूत कर सकता है।

भारत पिछले कुछ वर्षों से मानव रहित प्रणालियों और स्वदेशी रक्षा प्लेटफॉर्म के विकास पर लगातार जोर दे रहा है। Divyastra Mk3 इसी व्यापक स्वदेशी रक्षा तकनीक अभियान का हिस्सा माना जा सकता है।

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